सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं राष्ट्र संत मणिभद्र मुनि जी


विजय अंततः सत्य की ही होती है : राष्ट्रसंत डॉ. मणिभद्र मुनि”
“एक झूठ को छिपाने के लिए हजारों झूठ बोलने पड़ते हैं : डॉ. मणिभद्र मुनि”

दुर्ग, 7 अगस्त। वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के बैनर तले आयोजित चातुर्मासिक श्रृंखला की धर्मसभा में राष्ट्रसंत, मानव मिलन के संस्थापक परम पूज्य डॉ. मणिभद्र मुनि महाराज ने सत्य के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन देते हुए कहा कि “सत्य परेशान हो सकता है, पर कभी पराजित नहीं हो सकता।”
उन्होंने कहा कि साधु किसी भी परिस्थिति में असत्य भाषा का प्रयोग नहीं कर सकता, जबकि श्रावक (गृहस्थ) को व्यवहारिक जीवन में कभी-कभी परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेना पड़ सकता है। यदि किसी सत्य के बोलने से किसी निर्दोष के प्राण संकट में पड़ते हों, तो ऐसी स्थिति में श्रावक को मौन रहना अथवा हितकारी व्यवहार अपनाना उचित है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि सत्य जितना कठिन दिखाई देता है, उससे कहीं अधिक कठिन झूठ का मार्ग होता है। हमारा जीवन सत्य के आधार पर सहज रूप से चल सकता है, लेकिन झूठ के सहारे एक दिन भी शांति से नहीं जिया जा सकता। सत्य आत्मा का स्वभाव है, जबकि झूठ विभाव है। उन्होंने कहा कि एक झूठ हजारों झूठों को जन्म देता है और उसे छिपाने के लिए बार-बार असत्य का सहारा लेना पड़ता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सत्य के मार्ग पर दृढ़ता से चलना चाहिए। यह मार्ग भले ही कठिन प्रतीत हो, लेकिन जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सच्ची सफलता और आत्मिक शांति का आधार यही है।
धर्मसभा को साध्वी श्री लक्ष्मीजी महाराज एवं श्री पुनीत मुनि जी महाराज ने भी संबोधित कर धर्म, संयम एवं साधना के महत्व पर प्रकाश डाला। सभा का संचालन वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के मंत्री राकेश संचेती ने किया।
जय आनंद मधुकर रतन भवन में चातुर्मास के अवसर पर त्याग, तपस्या एवं आराधना का क्रम निरंतर गतिमान है। चातुर्मास प्रारंभ होने के साथ ही प्रतिदिन एक घंटे का नवकार महामंत्र अनुष्ठान हर्षोल्लास एवं श्रद्धाभाव के साथ संपन्न हो रहा है। प्रतिदिन श्रमण संघ परिवार का एक परिवार इस अनुष्ठान का लाभार्थी बनकर पुण्यार्जन कर रहा है।
इसी क्रम में 15 एवं 16 अगस्त को जय आनंद मधुकर रतन भवन में दुर्ग-भिलाई स्तरीय धार्मिक प्रश्न मंच क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता की तैयारियां श्रमण संघ महिला मंडल द्वारा उत्साहपूर्वक की जा रही हैं। श्री पुनीत मुनि जी महाराज के दिशा-निर्देशन में आयोजन की समस्त व्यवस्थाएं अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

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