एकल गान प्रतियोगिता में 45 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा चार वर्गों में आयोजित प्रतियोगिता में लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया

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दुर्ग में एकल गायन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, 45 प्रतिभागियों ने भजनों से बांधा समां
मुनि श्री मणिभद्र जी महाराज के पावन सानिध्य एवं पुनीत मुनि जी महाराज की प्रेरणा और मार्गदर्शन में चार वर्गों में हुई प्रतियोगिता

दुर्ग, छत्तीसगढ़। जय आनंद मधुकर रतन भवन, बांधा तालाब, दुर्ग में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के बैनर तले श्रमण संघ महिला मंडल द्वारा एकल गायन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। मानव मिलन के संस्थापक, नेपाल केसरी, राष्ट्र संत परम पूज्य मणिभद्र मुनि जी महाराज के पावन सानिध्य तथा पुनीत मुनि जी महाराज की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रतियोगिता में लगभग 45 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों ने अपनी मधुर आवाज में शानदार भजनों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रतियोगिता को चार आयु वर्गों में विभाजित किया गया था, ताकि सभी आयु वर्गों के प्रतिभागियों को अपनी गायन प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके।
चारों वर्गों के विजेताओं के नाम
प्रथम वर्ग — 5 से 15 वर्ष प्रथम स्थान — रूही
द्वितीय स्थान — वृषा जैन
तृतीय स्थान — संयमी जैन
द्वितीय वर्ग — 15 से 30 वर्ष प्रथम स्थान — आकांक्षा जैन
द्वितीय स्थान — काजल पारख
तृतीय स्थान — युक्ता बोहरा
तृतीय वर्ग — 30 से 50 वर्ष प्रथम स्थान — टीकम छाजेड़
द्वितीय स्थान — अमित गोलछा
तृतीय स्थान — रोमा पारख
चतुर्थ वर्ग — 50 वर्ष से अधिक प्रथम स्थान — श्रीमती कविता कर्णावट
द्वितीय स्थान — बसंत छत्तीसा बोहरा
तृतीय स्थान — पुष्पा जी जैन सांड
इसके अतिरिक्त श्रीमती कंचन देवी मारोटी को विशेष सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

निर्णायक मंडल ने किया प्रतिभाओं का मूल्यांकन
प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में श्री मनोज छाबड़ा, श्रीमती रुचि लालवानी एवं श्री जयप्रकाश जैन उपस्थित रहे। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की गायन शैली, सुर, लय एवं प्रस्तुति के आधार पर उनका मूल्यांकन किया।ओर
महिला मंडल के प्रयासों की सराहना की निर्णायकों ने भी भजन की प्रस्तुति दी
भक्ति गीत स्पर्धा में मणिभद्र मुनि जी महाराज ने भी दो भजनों से सभा को मंत्र मुग्ध कर दिया
श्रमण संघ महिला मंडल ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन में श्रीमती चंदा रुणवाल एवं श्रीमती अंकिता संचेती श्रीमती लेना पारख का विशेष सहयोग रहा। सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ भाग लेकर कार्यक्रम को यादगार बनाया।
इस आयोजन ने धार्मिक भजनों के माध्यम से भक्ति, संगीत एवं सांस्कृतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ विभिन्न पीढ़ियों को एक मंच पर जोड़ने का सराहनीय कार्य किया। प्रतियोगिता ने यह संदेश दिया कि भक्ति संगीत किसी आयु सीमा में बंधा नहीं है, बल्कि यह सभी को आध्यात्मिक आनंद और आपसी सद्भाव से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।

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