श्रमण संघ के प्रमुख सलाहकार जिन शासन का चमकता सितारा उप प्रवर्तक श्री विनय मुनि जी भीम म.सा का देवलोक गमन कल जोधपुर में निकलेगी महाप्रयाण डोल यात्रा - Jinshashansandesh
श्रमण संघीय प्रथम युवाचार्य श्री मधुकर मुनि जी म.सा. के सुशिष्य, मधुकर कुल के कमल, श्रमण संघीय सलाहकार, उपप्रवर्तक पूज्य श्री विनय मुनि जी म.सा. ‘भीम’ के देवलोकगमन के समाचार से जैन समाज में शोक की गहरी लहर व्याप्त है। उनके निधन से श्रमण संघ ने एक तपस्वी, विद्वान और समर्पित संत को खो दिया है। उनके संयमी जीवन और आध्यात्मिक साधना को कोटि-कोटि नमन और भावपूर्ण वंदन।
छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पुज्य गुरुदेव का दुर्ग एवं रायपुर चातुर्मास की कई यादगार संस्मरण जुड़े हे
दुर्ग का जय आनंद मधुकर रतन भवन का परिकल्पना ओर निमार्ण में आपका विशेष आशीर्वाद प्राप्त हुआ आपके सानिध्य में ही इस भवन का उद्धघाटन हुआ था
मधुकर कुल दीपक श्री विनय मुनि भीम का सन 2014 का चातुर्मास छत्तीसगढ़ प्रवर्तक लोकमान्य संत श्री रतन मुनि जी महाराज के सानिध्य में साथ हुआ था दुर्ग चातुर्मास के अनेक संस्मरण आज पुनः ताजा हो गए इन गुरु भगवंत के मार्गदर्शन ओर आशीर्वाद से जय आनंद मधुकर भवन तेयार हो गया
पूज्य श्री विनय मुनि जी म.सा. ‘भीम’ एक ऐसी विभूति थे जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन जैन धर्म और श्रमण परंपरा के सिद्धांतों के पालन में समर्पित कर दिया था। अपने गुरुदेव, प्रथम युवाचार्य श्री मधुकर मुनि जी म.सा. से प्राप्त दीक्षा और शिक्षा को उन्होंने अक्षरशः अपने जीवन में उतारा। मधुकर कुल के एक उज्ज्वल नक्षत्र के रूप में उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
श्रमण संघीय सलाहकार के रूप में उन्होंने संघ को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके विचारों में गहराई और अनुभव का सार होता था, जिससे संघ के कार्यों को नई दिशा और प्रेरणा मिलती थी। उपप्रवर्तक के रूप में उन्होंने अनेक साधकों को प्रव्रज्या मार्ग पर प्रेरित किया और उनके आध्यात्मिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूज्य श्री विनय मुनि जी म.सा. ‘भीम’ का जीवन त्याग, तपस्या और साधना का अनुपम उदाहरण था। उन्होंने कठोर तपश्चर्या और आत्म-संयम के द्वारा अपनी आत्मा को निर्मल बनाया। उनकी वाणी में अमृत का प्रवाह था, जिससे अनेक श्रद्धालुओं ने धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त की। उनके प्रवचनों में जैन दर्शन के गूढ़ रहस्यों को सरल और सुगम भाषा में प्रस्तुत करने की अद्भुत क्षमता थी।
वे केवल एक संत ही नहीं, बल्कि एक कुशल मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उन्होंने अनेक युवाओं को धर्म के प्रति आकर्षित किया और उन्हें संयमी जीवन के महत्व को समझाया। उनका शांत स्वभाव, मधुर वाणी और करुणापूर्ण हृदय सभी को अपनी ओर आकर्षित करता था।
पूज्य श्री विनय मुनि जी म.सा. ‘भीम’ का देवलोकगमन जैन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके द्वारा स्थापित आदर्श और मूल्य सदैव हमारे हृदय में जीवित रहेंगे। उनका त्याग, तपस्या और धर्म के प्रति निष्ठा हमें हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
इस दुःखद अवसर पर हम सब मिलकर पूज्य श्री विनय मुनि जी म.सा. ‘भीम’ के चरणों में अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके संयमी जीवन को बारंबार नमन वंदन। हम कामना करते हैं कि उनकी आत्मा को शांति मिले और वे शीघ्र ही मोक्ष को प्राप्त करें।
उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन वंदन