कामधेनु माता सोम्या को विधी विधान के साथ अंतिम विदाई दी गई


भावपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ दी गई पूज्य कामधेनु माता “सौम्या” को अंतिम विदाई
खैरागढ़, 10 जुलाई।
विश्व की 54 इंच लंबी पूँछ वाली एवं वर्ल्ड रिकॉर्ड से अलंकृत पूज्य कामधेनु माता “सौम्या” का आज प्रातः धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में पूर्ण श्रद्धा और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार एवं समाधि विधि-विधानपूर्वक संपन्न किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, गौभक्तों एवं जीवदया प्रेमियों ने उपस्थित होकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मनोहर गौशाला परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पूज्य सौम्या माता का आज रात्रि 2:27 बजे, लगभग 23 वर्ष की आयु में संथारापूर्वक मनोहर गौशाला, खैरागढ़ में देवलोक गमन हुआ। अंतिम क्षणों में वे प्रभु वाणी, णमोकार मंत्र एवं भक्तामर स्तोत्र का श्रवण करती हुईं अत्यंत शांत एवं समाधिमय भाव से देह त्याग कर गईं। उनका संपूर्ण जीवन गौसेवा, करुणा, अहिंसा एवं जीवदया का प्रेरणादायी उदाहरण रहा।
पूज्य सौम्या माता को अपने जीवनकाल में लगभग 142 जैन साधु-साध्वी भगवंतों एवं अनेक आचार्य भगवंतों से मांगलिक एवं णमोकार मंत्र का श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। साथ ही उन्हें सैकड़ों वैदिक संतों का सान्निध्य एवं दर्शन भी प्राप्त हुआ। प्रदेश के तीन महामहिम राज्यपालों सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने उनके दर्शन किए। पिछले लगभग 8 वर्षों में 30,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन कर उन्हें अपनी श्रद्धा एवं आस्था का केंद्र बनाया।
आज प्रातः से ही मनोहर गौशाला में अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दोपहर 12:36 बजे पूज्य सौम्या माता की समाधि यात्रा मनोहर गौशाला परिसर से श्रद्धापूर्वक निकाली गई। इसके पश्चात जीरावला मनोहर जीवदया धाम में वैदिक एवं जैन धार्मिक विधि-विधान के साथ उनकी समाधि संपन्न हुई।
इस अवसर पर उपस्थित संतजनों एवं श्रद्धालुओं ने कहा कि पूज्य कामधेनु माता “सौम्या” का जीवन सदैव गौसंरक्षण, जीवदया एवं अहिंसा का संदेश देता रहेगा। उनकी पुण्य स्मृति समाज को सेवा, करुणा एवं जीवमात्र के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा देती रहेगी।
मनोहर गौशाला परिवार, खैरागढ़ एवं समस्त जीवदया प्रेमियों ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पूज्य सौम्या माता के श्रीचरणों में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

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