113 उपवास की पुणाहुति विशेष आलेख
तप रत्नेश्वरी श्रीमती किरण देवी संचेती ने तप का रचा नया इतिहास
छत्तीसगढ़ की पहली महिला साधक जिन्होंने इतनी बड़ी तपस्या को दिया अंजाम जैन समाज में हर्ष की लहर
जैन धर्म की साधना में तपस्या को आत्मशुद्धि का सर्वोच्च साधन माना गया है। शरीर को अनुशासित कर आत्मा को उन्नति के पथ पर अग्रसर करने का यह मार्ग बहुत कठिन है, परंतु जब कोई साधक दृढ़ निष्ठा और अविचल संकल्प से इस मार्ग को चुनता है, तो उसका हर कदम समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।
ऐसी ही एक विलक्षण साधना और अद्वितीय संकल्प की उदाहरण हैं— श्रीमती किरण देवी संचेती जो तीन मासक्षमण की कठिन तपश्चर्या पूर्ण कर अब निरंतर चोथे मासक्षमण की ओर दृढ़ संकल्प के साथ अग्रसर हैं। 20 सितम्बर से प्रारंभ इस तप की पुणाहुति 10 दिसम्बर को होगी
छत्तीसगढ़ की पहली जैन महिला साधक जिन्होंने इतनी बड़ी तपस्या की ओर
अग्रसर है श्रमण संघ परिवार एवं सकल जैन समाज में हर्ष की लहर
लगातार एक साथ चार माह के करीब केवल दिन में तीन बार गर्म पानी पी कर (सूर्यास्त के बाद नहीं) यह उत्कृष्ट उपवास साधना लोगो को हेरत में डाल दिया हे
तप साधना के साथ साथ स्वध्याय सेवा में भी आपकी भुमिका अनुकरणीय है लगभग 30 वर्षों से जहां जैन गुरु भगवंत साध्वी जी चातुर्मास हेतु नहीं पहुंच पाते हें उन स्थानों पर देश के विभिन्न क्षेत्र में जाकर स्वाध्याय सेवा का अनुकरणीय कार्य आपके द्वारा किया जाता रहा है
श्रीमती किरण देवी संचेती ने चार मासक्षमण के करीब जिस अनूठी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाया है, वह स्वयं में एक अद्भुत प्रेरणा है। यह केवल तपस्या नहीं, बल्कि आत्मबल, धैर्य, संयम और विश्वास का अद्वितीय संगम है। उनकी यह तपश्चर्या साधना की मर्यादा और जीवन के उच्च आदर्शों को चरितार्थ करने का दिव्य उदाहरण बन गई है।
उनकी साधना का अगला चरण और भी अलौकिक है 113 उपवास पूर्ण करने का उनका संकल्प। यह केवल संख्या नहीं, बल्कि एक ऐसी आध्यात्मिक चोटी है जिस पर पहुंचना अदम्य इच्छाशक्ति, गहन श्रद्धा
इसके पूर्व भी श्रीमती किरण देवी संचेती ने 2000 से जैन संत श्री सुमती प्रकाश जी महाराज की पावन प्रेरणा से तपस्या की शुरुआत की पहला मासक्षमण सम्पन्न किया उसके बाद आपने अब तक 6 मासक्षमण पूर्ण किए हैं इसके अलावा 33,35,41,51,उपवास की तपस्या भी आपने निर्विघ्नता से सम्पन्नता की और अग्रसर हे श्रीमती संचेती हमेशा प्रेरणा देती है धर्म से जुड़े गुरु भगवंतो की सेवा भक्ति करें उन्हें सात पहुंचाएं गुरु एवं साध्वी भगवंतो की विहार सेवा में भाग ले स्वधर्मि की सहायता करें यही हमारा सच्चा धर्म है
श्रमण संघ परिवार में नित प्रतिदिन तपस्या का नया कीर्तिमान आपके द्वारा स्थापित किया गया है जो दुर्ग जैन समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण है
जैन दर्शन कहता है कि तप का अर्थ केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि अपने भीतर बसे विकारों, तृष्णाओं, क्रोध-अहंकार जैसे आंतरिक शत्रुओं का परास्त करना है। श्रीमती किरण देवी संचेती की तपश्चर्या इस गहन अर्थ को साकार करती है। उनका हर उपवास, हर नियम, हर संयम मानो आत्मा की पवित्रता की ओर उठाया गया एक नया कदम है।
समाज में जिस प्रकार से उनकी तपस्या की चर्चा हो रही है, वह इस बात का प्रमाण है कि आज भी धर्म और साधना लोगों के हृदय में गहरा स्थान रखते हैं। उनके इस प्रेरणादायी आचरण से युवाओं में भी संयम, सेवा, संस्कार और धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
साधना के इस दुर्लभ मार्ग पर चलते हुए उन्हें समाज, परिवार और गुरु-भगवतो तो तथा साध्वी समुदाय का आशीर्वाद मिलता रहा है, वह भी इस तप यात्रा की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब साधक का संकल्प और समाज का समर्थन एक सूत्र में बंध जाते हैं, तब ऐसे अद्भुत अध्याय जन्म लेते हैं, जिन्हें धर्म इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज किया जाता है।
अंततः श्रीमती किरण देवी संचेती की तपश्चर्या केवल व्यक्तिगत साधना की कहानी नहीं, बल्कि समूचे समाज के लिए प्रेरणा का आलोक है। उनका यह अद्भुत संकल्प और अनुभूत तपोबल सभी को यह संदेश देता है की
जहाँ विश्वास अटूट हो, वहाँ कठिन से कठिन तप भी सरल हो जाता है।
उनके चौथे मासक्षमण के तहत 113 उपवास के इस पवित्र संकल्प के लिए हम सभी हृदय से मंगलकामना करते हैं कि वे अपनी साधना को सफलतापूर्वक पूर्ण कर आत्मशक्ति और संयम का नया इतिहास रचे
इसके पूर्व भी जैन समाज दुर्ग में श्रीमती नंदा देवी पारख ने 108, श्रीमती लीला देवी ढेलढिया ने 109 उपवास की तपस्या सम्पन्न की हे जो जैन समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण है
इतनी बड़ी 111उपवास तपस्या के निमित्त श्रमण संघ परिवार दुर्ग ने 10 दिसम्बर को एक सामुहिक सामायिक एवं अनुमोदना के लिए सादगी पूर्ण आयोजन जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में रखा हे तपस्चर्या के निमित्त आडम्बरपूर्ण आयोजन का परिवार ने निषेध किया है
दुर्ग छत्तीसगढ़ की जैन तप साधिका श्रीमती किरण देवी संचेती के 113 उपवास के सम्मान में जय आनंद मधुकर रतन भवन बांधा तालाब दुर्ग में साध्वी मुमुक्षा श्रीजी साध्वी श्रद्धा श्री जी साध्वी कीर्ति श्री जी के पावन सानिध्य में तप अनुमोदना एवं 1 सामायिक की साधना करने जेन समाज के लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की और सामूहिक रूप से नवकार महामंत्र की स्तुति करते हुए उग्र तपस्वी श्रीमती किरण देवी संचेती की श्रमण संघ महिला मंडल एवं समरथ महिला मंडल ने भक्ति गीतों से अभिनंदन अनुमोदना किया
साध्वी श्री मुमुक्षा श्री ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए छोटे-छोटे उदाहरणों से धर्म से जोड़ने की प्रेरणा दी हम इतनी बड़ी तपस्या तो नहीं कर सकते पर छोटे-छोटे त्याग से अपने इस मानव जीवन को सफल जरूर बना सकते हैं साध्वी श्री ने कहा श्रीमती किरण देवी संचेती की तपस्या के उपलक्ष में 1111 साधकों ने छोटे-छोटे व्रत संकल्प लेकर इस साधना में अपना नाम लिखवाया और कल उनके 113 उपवास के तपस्या के निमित्त इतनी बड़ी संख्या में सम्पन्न हुई
1 दिन के लिए चार खन्ध त्याग करनें का संकल्प 1111 लोगों लिया संकल्प तप अनुमोदना पर चार खन्ध का त्याग
*रात्रि भोजन का त्याग, चोविहार का पालन, हरी सब्जी का त्याग बड़ी स्नान का त्याग ब्रह्मचर्य का पालन खड़े खड़े भोजन नहीं करना, टीवी मोबाइल देखते हुए भोजन नहीं करना हंसी मजाक करते हुए भोजन नहीं करना स्वाद लेते हुए खाना नहीं खाना बड़बड़ करते हुए खाना नहीं खाना ओर आज होने से पूर्व णमो सिद्धांण की माला फेरने का संकल्प दिया
आचार्य एवं युवाचार्य भगवंत का मंगल संदेश





